Faded Ink - Dhoondali Syaahi
धूंदली स्याही
सहर की किरण जब ढलने लगी,
सितारों की छाँव में यादें जगी
डाक में जब आया एक ख़ामोश पैग़ाम,
मुहर में छुपा था पुराना सलाम
हवा में यूँ बिखरी ख़ुशबू पुरानी,
जैसे लौट आई थी, तेरी कहानी
किताबें तो खो गयी वक़्त की धूल में,
कुछ कागज़ बचे हैं, बस उसूल में
लिफ़ाफ़ा रखा है यूँ दिल के पास,
जैसे मोहब्बत का हो कोई ख़ास
और वक़्त गुज़रता रहा चुपचाप,
यादें करती रहीं अपना हिसाब
मुहर की स्याही धुंधली सही,
मगर मोहब्बत थी वही
मोहब्बत थी वही


Comments
Post a Comment