Migrants

ये कौन लोग हैं ये कहाँ जा रहे हैं
पूछो तो कहते घर जा रहे हैं

जहाँ से आये थे ये भूखे आये थे
जहाँ जा रहे हैं ये भूखे ही जा रहे हैं

जो सड़क थी बनवाई इन्होने
उसी पर से चलते जा रहे हैं

निकले तो थे घर की तरफ ये
घर से पहले सड़कों पर ही मरे जा रहें हैं

ये कौन लोग हैं ये कहाँ जा रहे हैं  ...

Comments

Popular posts from this blog

My version of “Autumn Leaves”

Paradhin Aahe Jagati Putra Manavacha

संदीप खरेच्या कविता